विस्तृत उत्तर
शिव जी के दो मंत्र सर्वाधिक प्रभावी और शास्त्र-सम्मत माने गए हैं:
पंचाक्षरी मंत्र — 'ॐ नमः शिवाय' — यह यजुर्वेद के श्री रुद्रम् में वर्णित है और सबसे सरल व सर्वसुलभ मंत्र है। इसके पाँच अक्षर (न-मः-शि-वा-य) पाँच तत्वों के प्रतीक हैं — पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश। शिव पुराण में कहा गया है कि इस मंत्र के नियमित जप से 100 वेद पढ़ने के समान पुण्य मिलता है।
महामृत्युंजय मंत्र — 'ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥' — यह ऋग्वेद और यजुर्वेद दोनों में वर्णित महाशक्तिशाली मंत्र है। अर्थ — हे त्रिनेत्रधारी! जैसे पककर फल बेल से स्वतः अलग हो जाता है, उसी प्रकार हमें मृत्यु के भय से मुक्त करो और अमृत की ओर ले चलो। यह मंत्र रोग, भय, संकट, अकाल मृत्यु के निवारण और दीर्घायु के लिए सर्वोत्तम माना गया है।
कौन सा कब — सामान्य दैनिक जप और शिव-भक्ति के लिए 'ॐ नमः शिवाय'। किसी संकट, रोग, भय या विशेष अनुष्ठान के लिए महामृत्युंजय मंत्र।





