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विस्तृत उत्तर
सामान्य रूप से ॐ को सृष्टि का मूल नाद माना जाता है, लेकिन इस कथा में उससे भी सूक्ष्म बात कही गई है। यहाँ आदिनाद को ॐ से पहले की अव्यक्त ध्वनि अवस्था बताया गया है। ॐ अ, उ और म के रूप में सृष्टि, पालन और संहार का नाद है, जबकि आदिनाद उस विभाजन से पहले की चेतन ध्वनि है। इसलिए इस कथा में ॐ को नकारा नहीं गया, बल्कि आदिनाद को उसका और भी सूक्ष्म बीज माना गया है।
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