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विस्तृत उत्तर
संत उन महात्माओं को कहा गया है जो अंत में ब्रह्म को प्राप्त करते हैं। पाठ में सत् शब्द का अर्थ ब्रह्म बताया गया है। जो महात्मा उस ब्रह्म को प्राप्त करते हैं, वे ब्रह्मसायुज्य को प्राप्त होते हैं। इसी कारण वे संत कहलाते हैं। इसलिए संत का अर्थ केवल सज्जन व्यक्ति नहीं, बल्कि ब्रह्मप्राप्ति की ओर स्थित और अंततः ब्रह्मसायुज्य पाने वाले महात्मा से है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 10, PDF पृष्ठ 57, श्लोक 4
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