विस्तृत उत्तर
ब्रह्मा और विष्णु शिवलिंग का अंत इसलिए नहीं पा सके क्योंकि वह लिंग आदि-मध्य-अन्त से रहित था। विष्णु वाराह रूप लेकर नीचे की ओर गए और ब्रह्मा हंस रूप लेकर ऊपर की ओर गए। विष्णु एक हजार वर्ष तक नीचे जाते रहे, पर मूल का थोड़ा भी अंश नहीं देख सके। ब्रह्मा भी पूरा प्रयास करके ऊपर गए, पर अंत न देखकर थककर लौट आए। दोनों शंकर की माया से मोहित थे। अंत में वे लिंग का मूल-अंत न पाकर परमेश्वर को प्रणाम करते हुए विचार करने लगे कि यह क्या है।
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