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विस्तृत उत्तर
कामनाएँ भोग से इसलिए बढ़ती हैं क्योंकि उनके उपभोग से उनकी शान्ति नहीं होती। पाठ में इसकी उपमा अग्नि से दी गई है: जैसे आहुति डालने पर अग्नि और बढ़ती है, वैसे ही विषय-भोग से कामना भी बढ़ती जाती है। इसलिए विचारपूर्वक मन, वाणी और कर्म से भोगों के प्रति विरक्ति रखने की बात कही गई है। योगी के लिये यह वैराग्य अमृतत्व की दिशा में आवश्यक बताया गया है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 8, PDF पृष्ठ 43, श्लोक 24-25
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