विस्तृत उत्तर
गरुड़ ने अपनी माता विनता की मुक्ति के लिए नागों से उनकी मांग पूछी। नागों ने बदले में स्वर्ग से अमृत (अमरता का पेय) लाने की शर्त रखी। गरुड़ ने यह असंभव कार्य करने का प्रण लिया। उन्होंने देवताओं से भयंकर युद्ध किया, इंद्र को परास्त किया और अमृत कलश प्राप्त कर लिया। उनकी इस निस्वार्थता और अदम्य शक्ति से भगवान विष्णु इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने गरुड़ को अमरता का वरदान दिया और उन्हें अपना दिव्य वाहन बना लिया।
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