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विस्तृत उत्तर
जब सारे उपाय विफल हो गए और वानर सेना शोक में डूब गई, तब स्वयं भगवान विष्णु के वाहन और नागों के परम शत्रु गरुड़ देव आकाश से उतरे। गरुड़ के आते ही उनके स्वाभाविक भय के कारण सभी नाग श्रीराम और लक्ष्मण को बंधन मुक्त करके भाग खड़े हुए। तब गरुड़ ने बताया कि यह अस्त्र कद्रू के विषैले पुत्रों (नागों) की राक्षसी माया थी जिसे इंद्रजीत ने अपनी तपस्या के बल पर साधा था। इस प्रकार गरुड़ के आगमन मात्र से नागपाश का प्रभाव समाप्त हो गया।
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