विस्तृत उत्तर
श्रद्धा: शिव पर पूर्ण भरोसा (भक्ति) ही स्तोत्र की शक्ति को सक्रिय करता है।
शिव को केवल एक देवता नहीं, बल्कि जीवन के परम रक्षक (पाहिमाम्, रक्षमाम्) के रूप में स्वीकार करना चाहिए।
यह परम फल केवल उन्हीं भक्तों को मिलता है जो श्रद्धा और सात्त्विक भावना के साथ शिव की शरण में रहते हैं।





