विस्तृत उत्तर
नहीं। यह स्तुति दिव्य कल्याण के लिए है। इसका उपयोग किसी भी नकारात्मक, तामसिक या हानि पहुँचाने वाले उद्देश्य के लिए वर्जित है।
यदि पाठ का उद्देश्य लोभ, प्रतिशोध या दूसरों को हानि पहुँचाना हो, तो न केवल अपेक्षित लाभ प्राप्त नहीं होता, बल्कि मानसिक शांति भी भंग रहती है।
चन्द्रदोष का निवारण तभी संभव है जब मन स्वयं द्वेष और लालच से मुक्त हो।





