विस्तृत उत्तर
भगवान के अवतार का उद्देश्य स्पष्ट रूप से जीवों के परम कल्याण और उनकी भगवत प्रेममयी समृद्धि बताया गया है। ऋषि सूतजी से कहते हैं कि भगवान कृष्ण देवकी के गर्भ से क्यों अवतीर्ण हुए, यह वे सुनना चाहते हैं, क्योंकि भगवान का अवतार जीवों के कल्याण के लिये होता है। आगे वे भगवान के उदार कर्मों और उनकी अवतार कथाओं का वर्णन भी माँगते हैं। वे कहते हैं कि भगवान लीलासे अवतार धारण करते हैं और अपनी योगमाया से स्वतंत्र लीला करते हैं। नारद आदि महात्माओं ने उनके उदार कर्मों का गान किया है। इसलिए यहाँ अवतार को किसी सामान्य जन्म के रूप में नहीं, बल्कि करुणा, लीला, कल्याण और भगवत प्रेम से जुड़े दिव्य प्राकट्य के रूप में रखा गया है।
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