विस्तृत उत्तर
इस स्तोत्र का पाठ एक अनुष्ठान के रूप में नहीं, बल्कि दैनिक पूजा का अभिन्न अंग बनाकर किया जाना चाहिए।
निरंतरता और एकाग्रता ही इस स्तोत्र के द्वारा मानसिक शांति और चन्द्रदोष निवारण का मार्ग है।
जब मृत्यु का भय नष्ट हो जाता है, तो चन्द्रदोष से उत्पन्न होने वाली सभी छोटी मानसिक अशांतियाँ, चिंताएँ और अस्थिरताएँ स्वतः ही दूर हो जाती हैं।





