विस्तृत उत्तर
हरि वर्ष मेरु के दक्षिण में स्थित है। यहाँ दैत्यराज हिरण्यकशिपु के पुत्र और भगवान के परम भक्त प्रह्लाद जी के नेतृत्व में वहाँ के निवासी भगवान नृसिंह की उपासना करते हैं। प्रह्लाद जी यहाँ अपने स्तुति गान में अंतःकरण की शुद्धि, मृत्यु के भय से निर्भयता, गृह और संसार की आसक्ति से मुक्ति तथा भक्तों के संग की प्रार्थना करते हैं। प्रह्लाद जी भगवान नृसिंह से यह नहीं माँगते कि हमें भोग-विलास मिले या सांसारिक सुख मिले अपितु वे भगवत्-भक्ति की दृढ़ता, संसार-मोह से छुटकारा और संत-समागम की प्रार्थना करते हैं। यह प्रह्लाद जी की उच्चतम भक्ति का प्रतीक है जहाँ भक्त भगवान से केवल भक्ति ही माँगता है न कि लौकिक वस्तुएं। इस प्रकार हरि वर्ष प्रह्लाद जी की अनन्य निष्काम भक्ति का पावन क्षेत्र है।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक



