विस्तृत उत्तर
दुर्गा माँ का नाम 'दुर्गा' ही शत्रु-विजय का प्रतीक है। 'दुर्गा' = दुर्ग + आ — अर्थात जो दुर्ग (किला, संकट) से पार कराती हैं। उनका नाम जपना शत्रु और संकट-निवारण का सशक्त साधन है।
दुर्गा सप्तशती का प्रमाण — दुर्गा सप्तशती में देवताओं और असुरों के बीच युद्ध का वर्णन है। जब देवता पराजित हुए तब उन्होंने माँ दुर्गा की स्तुति की — 'सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते॥' — और माँ ने शत्रुओं का नाश किया।
देवी का स्वरूप और शक्ति — माँ दुर्गा त्रिशूल धारण करती हैं जो तीनों तापों के नाश का प्रतीक है। उनके नाम जप से भक्त के जीवन में आने वाले शत्रु — चाहे बाहरी हों या आंतरिक (काम, क्रोध, लोभ) — दोनों का नाश होता है।
नवरात्रि का महत्व — नवरात्रि में नौ दिन माँ के नौ रूपों का जप और पाठ होता है जो विशेष फलदायी है। 'जय अम्बे जय माँ दुर्गे' — यह उद्घोष मन में साहस और शत्रु-विजय का भाव जगाता है।
दुर्गा नाम जपते समय यह भाव रखें कि माँ दुर्गा आपके चारों ओर रक्षा-चक्र बना रही हैं।





