विस्तृत उत्तर
हनुमानजी को 'संकटमोचन' और 'भयहर' कहा जाता है। उनका नाम लेने से भय दूर होने का शास्त्रीय और पौराणिक आधार है।
हनुमान नाम की शक्ति — हनुमान चालीसा में कहा गया है — 'भूत पिशाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै॥' — जब हनुमानजी का महाबीर नाम सुनाई पड़ता है, तब भूत और पिशाच पास नहीं आते। यह केवल अंधविश्वास नहीं — मन का जो भय और आतंक है, वह हनुमान-स्मरण से दूर होता है।
हनुमानजी रुद्रावतार हैं — वे भगवान शिव के ग्यारहवें रुद्र के अवतार माने गए हैं। रुद्र का अर्थ है — दुखों को नष्ट करने वाला। इसलिए उनका नाम जपने से भीतरी और बाहरी दोनों प्रकार के भय का नाश होता है।
राम-नाम की सुरक्षा — हनुमानजी के हृदय में सदा राम विराजमान हैं। उनका नाम लेना अप्रत्यक्ष रूप से राम का नाम लेना है। जहाँ राम-नाम है वहाँ कोई भय नहीं। हनुमानजी स्वयं कहते हैं — 'मन क्रम वचन ध्यान जो लावै, सो पावहि संकट से छुटकावै।'
कलियुग में विशेष — शास्त्रों में कहा गया है कि कलियुग में हनुमानजी चिरंजीवी हैं और जो उनका नाम लेता है वे स्वयं उपस्थित हो जाते हैं। इसीलिए कलियुग में हनुमान भक्ति सर्वाधिक फलदायी मानी जाती है।





