विस्तृत उत्तर
भगवान गणेश को 'विद्या-विनायक' और 'बुद्धिदाता' कहा जाता है। उनके नाम में ही बुद्धि-वर्धन की शक्ति है।
गणेश नाम का रहस्य — 'गण' का अर्थ है समूह, 'ईश' का अर्थ है स्वामी। गणेश समस्त गणों के अधिपति हैं। उनका मस्तक हाथी का है जो स्मृति, विवेक और बुद्धि का प्रतीक है। हाथी को सबसे बुद्धिमान प्राणी माना जाता है।
ॐ गं गणपतये नमः' — यह गणेश का बीज मंत्र है। 'गं' गणेश का बीजाक्षर है। इसका नियमित जप एकाग्रता बढ़ाता है, स्मरण शक्ति तीव्र होती है और निर्णय-क्षमता में वृद्धि होती है।
गणेश और सिद्धि-बुद्धि — पुराणों में गणेश की दो पत्नियाँ हैं — सिद्धि और बुद्धि। जो गणेश का नाम जपता है उसे सिद्धि (सफलता) और बुद्धि (विवेक) दोनों की प्राप्ति होती है।
विद्यारंभ संस्कार — किसी भी नई शिक्षा या कार्य का आरंभ गणेश-वंदना से करने की परंपरा इसीलिए है। 'ॐ गणेशाय नमः' कहकर आरंभ करने से मन बाधाओं से मुक्त होकर नई बात ग्रहण करने के लिए तैयार होता है।
चौथ-व्रत — भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी पर गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। इस दिन गणेश जप और 'ॐ गं गणपतये नमः' की माला से विशेष बुद्धि-वर्धन होता है।





