विस्तृत उत्तर
राम नाम को सनातन परंपरा में 'तारक मंत्र' कहा गया है — वह मंत्र जो जन्म-मृत्यु के सागर से पार करा दे।
शास्त्रों में राम नाम की महिमा — शिव पुराण में वर्णन है कि भगवान शिव काशी में मरने वाले प्रत्येक प्राणी के कान में 'राम-राम' का तारक मंत्र सुनाते हैं, जिससे उसे मुक्ति मिलती है। इसीलिए काशी को 'मुक्तिधाम' कहा जाता है।
रामचरितमानस में तुलसीदास जी कहते हैं — 'चहुँ जुग तीनि काल तिहुँ लोका। भए नाम जपि जीव बिसोका॥' — चारों युगों में, तीनों कालों में और तीनों लोकों में राम नाम जपकर जीव शोकरहित हुए हैं।
राम नाम = विष्णु के हजार नाम — स्कन्दपुराण में कहा गया है कि 'राम' नाम विष्णु सहस्रनाम के समान है। एक बार 'राम' कहने से विष्णुजी के एक हजार नाम लेने का फल मिलता है।
व्याकरणिक रहस्य — राम = र + अ + म। 'र' रुद्र का बीज है, 'अ' विष्णु का बीज है, 'म' शिव का बीज है। इस प्रकार 'राम' नाम में त्रिमूर्ति की शक्ति समाहित है।
हनुमानजी का प्रमाण — जब हनुमानजी ने राम नाम जपने वाले एक राजा की रक्षा की, तब स्वयं श्रीराम शक्तिबाण से उसे नहीं मार सके। तब ऋषि विश्वामित्र ने कहा — 'जो बल राम के नाम में है, वह खुद राम में नहीं है।' यह प्रसंग राम-नाम की सर्वोच्चता का प्रमाण है।





