विस्तृत उत्तर
माँ लक्ष्मी धन, समृद्धि और ऐश्वर्य की देवी हैं। उनके नाम में 'लक्ष्म' — जो शुभ लक्षणों और सौभाग्य का बोध कराता है — निहित है।
लक्ष्मी नाम और श्री सूक्त — ऋग्वेद के श्री सूक्त में माँ लक्ष्मी की स्तुति है — 'तां म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम्। यस्यां हिरण्यं प्रभूतं गावो दास्यो अश्वान् विन्देयम् पुरुषानहम्॥' — हे जातवेद (अग्निदेव), मेरे पास वह लक्ष्मी ले आओ जो कभी नहीं जातीं।
लक्ष्मी नाम जप का रहस्य — माँ लक्ष्मी 'श्री' स्वरूपा हैं। 'ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' — यह उनका बीज मंत्र है जिसमें 'श्रीं' लक्ष्मी का बीजाक्षर है। इसके नियमित जप से भाग्य और धन-प्राप्ति के मार्ग खुलते हैं।
धन केवल मुद्रा नहीं — लक्ष्मी की कृपा केवल धन के रूप में नहीं आती। वे अष्टलक्ष्मी हैं — धनलक्ष्मी, धान्यलक्ष्मी, वीरलक्ष्मी, ऐश्वर्यलक्ष्मी, सन्तानलक्ष्मी, विजयलक्ष्मी, विद्यालक्ष्मी और गजलक्ष्मी। उनका नाम जपने से जीवन के सभी आयामों में समृद्धि आती है।
साथ में पुरुषार्थ — शास्त्र यह भी कहते हैं कि लक्ष्मी उसे प्रिय हैं जो परिश्रमी, ईमानदार और आचार-शुद्ध हो। नाम जप के साथ सत्कर्म और सदाचार अनिवार्य हैं।





