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विस्तृत उत्तर
ब्रह्मा स्तुति में देवी को स्वाहा, स्वधा, वषट्कार, सुधा, सावित्री और देवों की परम जननी कहा गया है। ब्रह्मा जी यह बताते हैं कि देवी ही यज्ञ की शक्ति हैं, पितरों की तृप्ति हैं, अमृत हैं और ओंकार की सूक्ष्म अर्धमात्रा भी हैं। आगे वे देवी को सृष्टि की धारिणी, रचयिता, पालनकर्त्री और संहारकर्त्री कहते हैं। मधु कैटभ कथा में यह स्तुति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ब्रह्मा जी इसी के माध्यम से योगनिद्रा से प्रार्थना करते हैं कि वे विष्णु को जगाएँ और असुरों को मोह में डालें।
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