विस्तृत उत्तर
सनातन धर्म की ज्ञान-गंगा में दशमहाविद्याओं का स्थान सर्वोच्च है। ये केवल देवियाँ नहीं, अपितु उस एक पराशक्ति के दस दिव्य स्वरूप हैं, जो सृष्टि का सृजन, पालन और संहार करती हैं।
इन्हीं महाविद्याओं में भगवती त्रिपुर भैरवी का स्थान है, जो भगवान शिव के उग्र स्वरूप 'भैरव' की संघारिणी शक्ति हैं। वे तप, अग्नि और विध्वंस की मूर्तिमान स्वरूप हैं, जिनका स्मरण मात्र साधक के भीतर आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार कर देता है।
माँ त्रिपुर भैरवी की साधना अत्यंत तीव्र और तेजस्वी मानी गई है। यह केवल भौतिक कामनाओं की पूर्ति का मार्ग नहीं, अपितु स्वयं को तपाकर कुंदन बनाने की एक गहन आध्यात्मिक प्रक्रिया है।





