असितांग भैरव के ध्यान श्लोक का क्या अर्थ है?
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ध्यान श्लोक का अर्थ: रक्त ज्वाला जटा, तेजस्वी, शूल-कपाल-पाश-डमरू धारी, श्वान वाहन, त्रिनेत्र, क्षेत्रस्य पालम् — वे साधक के परिवेश और शरीर की रक्षा करते हैं।
- 1रक्त की ज्वाला जैसी जटाओं वाला
- 2रक्त के समान तेजस्वी
- 3शूल, कपाल, पाश और डमरू धारण करके लोकों की रक्षा करने वाले
- 4निर्वाण स्वरूप, श्वान वाहन पर आरूढ़, तीन नेत्रों वाला
- 5क्षेत्र का पालक (क्षेत्रस्य पालम्) बताता है।
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असितांग भैरव मंत्र
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