विस्तृत उत्तर
ध्यान श्लोक वस्तुतः इष्ट-देवता के आवाहन का केंद्रित रूप है। यह वाचिक-पाठ से पूर्व ही साधक के चारों ओर एक 'मानसिक-कवच' का निर्माण कर देता है। जिस देवता का चित्त में आवाहन न किया गया हो, उससे रक्षा प्राप्त नहीं की जा सकती।
ध्यान पाठ से पहले ही एक मानसिक सुरक्षा कवच बना देता है और इष्ट देवता को हृदय में स्थापित करता है।
ध्यान श्लोक वस्तुतः इष्ट-देवता के आवाहन का केंद्रित रूप है। यह वाचिक-पाठ से पूर्व ही साधक के चारों ओर एक 'मानसिक-कवच' का निर्माण कर देता है। जिस देवता का चित्त में आवाहन न किया गया हो, उससे रक्षा प्राप्त नहीं की जा सकती।
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