विस्तृत उत्तर
एक बार शिवलिंग प्रतिष्ठित हो जाने के बाद, साधक का यह परम कर्तव्य है कि वह उसकी नित्य-नियमित पूजा करे, क्योंकि अब वे मात्र एक प्रतीक नहीं, बल्कि साक्षात् शिव के जीवंत स्वरूप हैं।
प्रतिष्ठित शिवलिंग की नित्य पूजा इसलिए जरूरी है क्योंकि अब वे मात्र प्रतीक नहीं बल्कि साक्षात् शिव के जीवंत स्वरूप हैं — यह साधक का परम कर्तव्य है।
एक बार शिवलिंग प्रतिष्ठित हो जाने के बाद, साधक का यह परम कर्तव्य है कि वह उसकी नित्य-नियमित पूजा करे, क्योंकि अब वे मात्र एक प्रतीक नहीं, बल्कि साक्षात् शिव के जीवंत स्वरूप हैं।
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