विस्तृत उत्तर
जो व्यक्ति षोडशोपचार या विस्तृत पूजा नहीं कर सकते उनके लिए 'पंचोपचार पूजा' सबसे सरल और शास्त्रसम्मत विधि है। इसमें पाँच उपचारों से पूजा सम्पन्न होती है।
पंचोपचार पूजा की विधि:
पहला — स्नान और शुद्धि: सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।
दूसरा — दीप और धूप जलाएँ: पूजा की शुरुआत में दीप जलाएँ और एक अगरबत्ती या धूपबत्ती लगाएँ।
तीसरा — गंध-पुष्प अर्पण: देवता को एक फूल या तुलसी-पत्ता अर्पित करें और चंदन लगाएँ।
चौथा — नैवेद्य: जो भी भोजन बना हो, उसका एक अंश भगवान के सामने रखें और 'त्वदीयं वस्तु गोविन्द तुभ्यमेव समर्पये' मंत्र बोलें।
पाँचवाँ — आरती और प्रणाम: देवता की आरती करें और प्रणाम करें।
अंत में — अपराध-क्षमापन मंत्र बोलें: 'अपराधसहस्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया...'
यदि इतना भी संभव न हो तो सुबह उठते ही भगवान का एक नाम लेना, शाम को एक दीप जलाना — यही न्यूनतम भक्ति है। शास्त्र कहते हैं — देवता भाव के भूखे हैं, विधि के नहीं।





