विस्तृत उत्तर
शिव पूजा में नियमितता (consistency) सबसे महत्वपूर्ण तत्व है:
शास्त्रीय महत्व
- 1शिव पुराण: 'अखंड जप-साधना करने वाला साधक कदापि विफल नहीं होता।' नियमित पूजा शिव को सबसे अधिक प्रिय है।
- 1पतंजलि योग सूत्र: 'स तु दीर्घकालनैरन्तर्यसत्कारासेवितो दृढभूमिः' — अभ्यास दीर्घकाल तक, निरंतर और श्रद्धापूर्वक किया जाए तो दृढ़ हो जाता है।
- 1भगवद्गीता (12.10): 'अभ्यासयोगेन' — अभ्यास योग से ईश्वर प्राप्ति।
नियमितता के लाभ
- ▸मन की चंचलता घटती है, एकाग्रता बढ़ती है।
- ▸मंत्र जप की शक्ति क्रमशः बढ़ती जाती है।
- ▸शिव-कृपा निरंतर बनी रहती है।
- ▸कर्म बंधनों का क्रमिक क्षय होता है।
- ▸जीवन में स्थिरता, शांति और सकारात्मकता आती है।
नियमितता कैसे बनाएं
- ▸प्रतिदिन एक ही समय पर पूजा करें (ब्रह्म मुहूर्त सर्वोत्तम)।
- ▸पूजा की न्यूनतम मात्रा निश्चित करें — कम से कम एक माला जप, जलाभिषेक।
- ▸कम करें पर नियमित करें — 'अल्प किन्तु नित्य' यही सिद्धांत है।
- ▸व्यस्तता में भी कम से कम मानसिक जप ('ॐ नमः शिवाय') जारी रखें।
चेतावनी: अनियमित पूजा से मंत्र शक्ति क्षीण होती है। शुरू की गई साधना बीच में छोड़ना शास्त्रों में अशुभ कहा गया है। यदि पूजा नहीं कर पाएं तो कम से कम शिव स्मरण अवश्य करें।





