प्रणव 'ॐ' क्या है का सबसे सीधा सार यह है: प्रणव 'ॐ' नाद-ब्रह्म की सबसे पहली और स्थूल अभिव्यक्ति है — ॐ ही वह मूल ध्वनि है जिससे सम्पूर्ण वेद, समस्त मंत्र और यह चराचर जगत उत्पन्न हुआ...
शब्द ब्रह्म और नाद ब्रह्म जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
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•शब्द ब्रह्म और नाद ब्रह्म श्रेणी के दूसरे प्रश्न इस उत्तर की सीमा और उपयोग दोनों स्पष्ट करते हैं।
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