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जप विधि📜 मंत्र महोदधि — जप विधि, धर्म सिंधु, नित्यकर्म पूजा प्रकाश2 मिनट पठन

मंत्र जप का सही तरीका क्या है?

संक्षिप्त उत्तर

जप का सही तरीका: स्नान → आसन (रीढ़ सीधी) → आचमन → संकल्प → गणेश वंदना → जप (माला, सुमेरु से, उपांशु/मानस) → समर्पण ('जप फल देव को अर्पित') → क्षमा प्रार्थना → कुछ क्षण मौन। संकल्प और समर्पण — दो सबसे महत्वपूर्ण।

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विस्तृत उत्तर

मंत्र जप की पूर्ण विधि मंत्र महोदधि और धर्म सिंधु में वर्णित है:

मंत्र जप का क्रम

1तैयारी

  • स्नान, स्वच्छ वस्त्र
  • जप स्थान साफ करें
  • दीपक और अगरबत्ती जलाएं

2आसन

कुश या ऊनी आसन। रीढ़ सीधी।

3शुद्धि

  • आचमन (तीन बार जल)
  • प्राणायाम (तीन गहरी साँसें)

4संकल्प

ॐ विष्णुः... अद्य... श्री [देव नाम] प्रीत्यर्थं [मंत्र नाम] जपं करिष्ये।

5गणेश वंदना

सभी जपों से पहले — 'ॐ गं गणपतये नमः' — 3 या 11 बार।

6मंत्र न्यास (वैकल्पिक)

तंत्र शास्त्र — हाथ की उँगलियों पर मंत्र के अक्षर — शरीर को मंत्र-मय करना।

7जप

  • माला दाहिने हाथ में, गोमुखी में
  • सुमेरु से आरंभ
  • उपांशु या मानस जप
  • नियत संख्या पूरी करें

8समर्पण

यत्किंचित् जपफलं स्यात् तत् सर्वं श्री [देव नाम] अर्पणमस्तु।

9क्षमा प्रार्थना

गलत उच्चारण या भटकाव के लिए क्षमा।

10जप के बाद

कुछ क्षण मौन में बैठें।

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शास्त्रीय स्रोत
मंत्र महोदधि — जप विधि, धर्म सिंधु, नित्यकर्म पूजा प्रकाश
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