विस्तृत उत्तर
मंत्र जप की पूर्ण विधि मंत्र महोदधि और धर्म सिंधु में वर्णित है:
मंत्र जप का क्रम
1तैयारी
- ▸स्नान, स्वच्छ वस्त्र
- ▸जप स्थान साफ करें
- ▸दीपक और अगरबत्ती जलाएं
2आसन
कुश या ऊनी आसन। रीढ़ सीधी।
3शुद्धि
- ▸आचमन (तीन बार जल)
- ▸प्राणायाम (तीन गहरी साँसें)
4संकल्प
ॐ विष्णुः... अद्य... श्री [देव नाम] प्रीत्यर्थं [मंत्र नाम] जपं करिष्ये।
5गणेश वंदना
सभी जपों से पहले — 'ॐ गं गणपतये नमः' — 3 या 11 बार।
6मंत्र न्यास (वैकल्पिक)
तंत्र शास्त्र — हाथ की उँगलियों पर मंत्र के अक्षर — शरीर को मंत्र-मय करना।
7जप
- ▸माला दाहिने हाथ में, गोमुखी में
- ▸सुमेरु से आरंभ
- ▸उपांशु या मानस जप
- ▸नियत संख्या पूरी करें
8समर्पण
यत्किंचित् जपफलं स्यात् तत् सर्वं श्री [देव नाम] अर्पणमस्तु।
9क्षमा प्रार्थना
गलत उच्चारण या भटकाव के लिए क्षमा।
10जप के बाद
कुछ क्षण मौन में बैठें।





