विस्तृत उत्तर
महामृत्युंजय मंत्र जप की विधि शिव पुराण और मंत्र महोदधि में वर्णित है:
जप से पूर्व तैयारी
- 1ब्रह्ममुहूर्त या प्रदोष काल में स्नान
- 2कुश या ऊनी आसन — पूर्व या उत्तर मुख
- 3शिवलिंग या शिव चित्र सामने रखें
- 4घी का दीप जलाएं
- 5भस्म का त्रिपुंड तिलक लगाएं
माला
रुद्राक्ष माला से जप — यह सर्वोत्तम है। रुद्राक्ष शिव के अश्रुबिंदु से उत्पन्न माना गया है।
ध्यान श्लोक
जप आरंभ से पूर्व शिव का ध्यान:
> 'ध्यायेन्नित्यं महेशं रजतगिरिनिभं चारुचंद्रावतंसं, रत्नाकल्पोज्ज्वलांगं परशुमृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम्...'
(चाँदी के पर्वत जैसे, चंद्रमा धारण किए, प्रसन्न शिव का ध्यान)
जप विधि
- 1प्रत्येक माला पूर्ण होने पर माला को सिर से लगाएं
- 2सुमेरु (मुख्य मनका) न लांघें — माला पलटें
- 3'ॐ' — नाभि से, 'त्र्यम्बकं...' — हृदय से बोलें
- 4मन में शिव के त्रिनेत्र का ध्यान
जप संख्या
- ▸नित्य: 108 (1 माला)
- ▸रोग में: 1008 (11 माला)
- ▸गंभीर संकट: 21 दिन × 1008 = 21,168
पुरश्चरण
मंत्र महोदधि के अनुसार महामृत्युंजय में 9 अक्षर हैं (त्र्यम्बकं... के मूल अक्षर)। पुरश्चरण = 9 लाख जप। इसके बाद दशांश हवन — 'ॐ त्र्यम्बकं... स्वाहा'
हवन सामग्री
तिल, घी, बेलपत्र — प्रत्येक 'स्वाहा' पर एक आहुति।
गंभीर रोग में विशेष
रोगी के नाम-गोत्र के साथ संकल्प लेकर जप करें। 108 मंत्र पानी पर जपकर रोगी को पिलाएं — यह पारंपरिक चिकित्सा पद्धति है।




