विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण के प्रेतकल्प में यमदूतों के दाँतों और आँखों का अत्यंत विशद और भयावह वर्णन किया गया है। यह वर्णन पापी जीवात्मा को लेने आने वाले यमदूतों का है।
यमदूतों के दाँतों के विषय में गरुड़ पुराण में कहा गया है कि वे मृत्यु के समय 'दाँतों को कटकटाते हुए' आते हैं। यह कटकटाने की आवाज स्वयं में इतनी भयावह है कि मरणासन्न जीव उसे सुनकर और भी अधिक भयभीत हो जाता है। गरुड़ पुराण के तीसरे अध्याय में यमदूतों की 'बड़ी-बड़ी दाढ़ों' का वर्णन भी मिलता है जिससे उनका मुख और भी विकराल दिखता है।
यमदूतों की आँखों के विषय में वर्णन है कि वे 'क्रोधपूर्ण नेत्र' वाले होते हैं — अत्यंत लाल और क्रोध से भरी हुई आँखें। गरुड़ पुराण के तीसरे अध्याय में इन्हें 'बावली के समान गोल नेत्र वाले' और 'लाल-लाल आँखों वाले' कहा गया है। ये नेत्र न करुणा से भरे हैं, न शांत — ये न्याय और दंड के प्रतीक हैं।
यह वर्णन पापकर्मों के परिणाम को रेखांकित करने के लिए किया गया है ताकि मनुष्य जीवन में सद्कर्म करे और ऐसे भयावह मार्ग से बचे।





