श्री विद्याश्री चक्र की पूजा विधि और नौ आवरणों का क्या अर्थ है?9 आवरण (बाहर→केंद्र): 1.भूपुर→2.16 कमल→3.8 कमल→4.14 त्रिकोण→5.10 बाह्य→6.10 आंतर→7.8 त्रिकोण→8.त्रिकोण→9.बिंदु (ललिता)। नवावरण पूजा = प्रत्येक आवरण के देवता। गुरु अनिवार्य।#श्री चक्र#9 आवरण#पूजा
श्री विद्याश्री यंत्र में नौ आवरणों का क्या अर्थ है?9 आवरण (बाहर→भीतर): भूपुर (प्रवेश), 16 दल, 8 दल, 14 त्रिकोण, बाहर 10, भीतर 10, 8 त्रिकोण, मूल त्रिकोण, बिंदु (परमानंद=ललिता=ब्रह्म)। = सृष्टि→ब्रह्म यात्रा। गुरु दीक्षा से नवावरण पूजा।#श्री यंत्र
श्री विद्याश्री यंत्र की नवावरण पूजा कैसे करें?गुरु दीक्षा अनिवार्य। बाहर (भूपुर)→भीतर (बिंदु) क्रमिक। प्रत्येक आवरण: विशिष्ट देवी+मुद्रा+मंत्र। ललिता सहस्रनाम/त्रिशती। [समीक्षा आवश्यक] — विस्तृत विधि गुरुमुखी। सामान्य: सहस्रनाम+यंत्र दर्शन=सुरक्षित।#नवावरण#पूजा#श्री विद्या