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त्रिपुरसुंदरी से जुड़े सभी प्रश्न(4)

त्रिपुरसुंदरी पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 4 प्रश्न उपलब्ध हैं।

शक्ति उपासना

श्री चक्र और श्री यंत्र में क्या अंतर है?

श्री चक्र = श्री यंत्र = मूलतः एक (ललिता त्रिपुरसुंदरी प्रतीक)। सूक्ष्म भेद: चक्र=2D, यंत्र=3D (मेरु)। 9 त्रिकोण (4 शिव+5 शक्ति)=43 त्रिकोण, बिंदु=परम शक्ति। सौंदर्यलहरी: ब्रह्मांड मानचित्र। गुरु दीक्षा से पूजा श्रेष्ठ।

#श्री चक्र#श्री यंत्र#ललिता
श्री विद्या

श्री यंत्र में नौ आवरणों का क्या अर्थ है?

9 आवरण (बाहर→भीतर): भूपुर (प्रवेश), 16 दल, 8 दल, 14 त्रिकोण, बाहर 10, भीतर 10, 8 त्रिकोण, मूल त्रिकोण, बिंदु (परमानंद=ललिता=ब्रह्म)। = सृष्टि→ब्रह्म यात्रा। गुरु दीक्षा से नवावरण पूजा।

#श्री यंत्र#नवावरण#ललिता
तंत्र साधना

श्रीविद्या साधना क्या है?

श्रीविद्या = त्रिपुरसुंदरी की पूर्ण उपासना — मंत्र + यंत्र + तंत्र का समन्वय। तीन आधार: पंचदशाक्षरी (वाग्भव + कामराज + शक्ति खण्ड), श्री यंत्र (9 त्रिकोण + ब्रह्माण्ड-नक्शा), नवावरण पूजा। दीक्षा अनिवार्य: समय → पूर्णाभिषेक → महापूर्णाभिषेक। फल: सौंदर्य-विद्या-धन-मोक्ष — सभी पुरुषार्थ।

#श्रीविद्या#त्रिपुरसुंदरी#श्री यंत्र
तंत्र साधना

त्रिपुरा सुंदरी साधना क्या है?

त्रिपुरसुंदरी = ललिता = षोडशी = श्रीविद्या की सर्वोच्च देवी। मंत्र: पंचदशाक्षरी (15 अक्षर — गुरु-दत्त), षोडशी (16 अक्षर — उच्चतम)। यंत्र: श्री यंत्र। वस्त्र: लाल रेशम। पुरश्चरण: 15 लाख। विशेषता: सौम्य तंत्र — सौंदर्य, लक्ष्मी, विद्या, और मोक्ष। श्रीविद्या = इन्हीं की विद्या।

#त्रिपुरसुंदरी#षोडशी#ललिता
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