विस्तृत उत्तर
संवर्त अस्त्र केवल एक दिव्यास्त्र नहीं बल्कि एक पौराणिक प्रतीक है। यह यम और काल की उस अंतिम शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है जिसके आगे कोई तर्क या प्रतिरोध काम नहीं करता। यह अस्त्र उस ब्रह्मांडीय संतुलन के सिद्धांत को रेखांकित करता है जहाँ धर्म की स्थापना के लिए कभी-कभी पूर्ण विनाश भी आवश्यक हो जाता है। लेकिन ऐसी शक्ति का प्रयोग इतना भयानक है कि इसे केवल एक बार एक आदर्श पुरुष द्वारा एक दिव्य आदेश पर ही उचित ठहराया गया। यह धर्म की अंतिम सत्ता का वह शस्त्र है जो परम शक्ति के अस्तित्व और उसके उपयोग के लिए आवश्यक असाधारण नैतिक जिम्मेदारी की चेतावनी देता है।
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