विस्तृत उत्तर
महाभारत लिखने का उद्देश्य स्पष्ट बताया गया है। स्त्री, शूद्र और पतित जाति के लोग त्रयी वेद-श्रवण के अधिकारी नहीं माने गए, इसलिए वे कल्याणकारी शास्त्रोक्त कर्मों के आचरण में भूल कर सकते थे। उनका भी कल्याण हो, यह सोचकर महामुनि व्यासजी ने कृपा करके महाभारत इतिहास की रचना की। व्यासजी स्वयं कहते हैं कि महाभारत के बहाने उन्होंने वेद के अर्थ को खोल दिया, जिससे स्त्री, शूद्र आदि भी अपने-अपने धर्म-कर्म का ज्ञान प्राप्त कर लेते हैं। इसलिए महाभारत केवल युद्धकथा नहीं, बल्कि वेदार्थ और धर्मज्ञान को आम जन तक पहुँचाने के लिए रचा गया करुणामय ग्रंथ है।
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