विस्तृत उत्तर
योग, तपस्या और धर्म को श्रीकृष्ण से जोड़ा गया है। पाठ कहता है कि योग श्रीकृष्ण के लिये किए जाते हैं। समस्त कर्मों की परिसमाप्ति भी श्रीकृष्ण में होती है। ज्ञान से श्रीकृष्ण की प्राप्ति होती है और तपस्या श्रीकृष्ण की सत्ता के लिये की जाती है। धर्म का अनुष्ठान भी श्रीकृष्ण के लिये होता है और सभी गतियाँ अंत में श्रीकृष्ण में ही समा जाती हैं। इसका अर्थ है कि योग केवल शरीर या मन की साधना नहीं, तपस्या केवल कठिन अभ्यास नहीं, और धर्म केवल बाहरी नियम नहीं है। इन सबका सच्चा केंद्र वासुदेव श्रीकृष्ण हैं। यदि वे कृष्ण से न जुड़ें, तो उनका अंतिम तात्पर्य अधूरा रह जाता है।
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