विस्तृत उत्तर
उद्धरण पञ्चभूसंस्कार का चतुर्थ चरण है। अंगूठे और अनामिका उंगली (मृगी मुद्रा) को मिलाकर, उन खींची गई तीनों रेखाओं से थोड़ी-थोड़ी मिट्टी (किंचित मृत्तिका) चुटकी में उठाकर बाएँ हाथ में रखी जाती है। तत्पश्चात उस मिट्टी को दाहिने हाथ से ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में फेंक दिया जाता है।
यह क्रिया इस बात का प्रतीक है कि भूमि के भीतर छिपी हुई किसी भी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा या आसुरी शक्तियां को यज्ञ क्षेत्र से बाहर निकाल दिया गया है।





