विस्तृत उत्तर
यज्ञ-वेदी का निर्माण शुल्बसूत्रों (जैसे कात्यायन शुल्बसूत्र, बौधायन शुल्बसूत्र) के ज्यामितीय नियमों के आधार पर किया जाता है। यद्यपि बड़े अनुष्ठानों में वेदी का आकार अत्यंत विस्तृत होता है, परंतु सामान्य दैनिक देव-यज्ञ के लिए 24x24 अंगुल चौकोर भूमि को नापकर और उसे कुछ अंगुल गहरा खोदकर हवन कुंड निर्मित किया जाता है।
आधुनिक समय में तांबे या लोहे के बने बने-बनाए चौकोर अथवा अष्टकोणीय कुण्डों का भी प्रचलन है।




