विस्तृत उत्तर
जिस प्रकार मनुष्य के गर्भाधान से लेकर मृत्यु तक विभिन्न संस्कार होते हैं, उसी प्रकार अग्नि देव को स्थापित करने से पूर्व उस भूमि (वेदी) को जाग्रत एवं दोषमुक्त करने के लिए पाँच विशिष्ट क्रियाएं की जाती हैं, जिन्हें 'पञ्चभूसंस्कार' कहा जाता है। यह एक अत्यंत गूढ़ वैज्ञानिक और आध्यात्मिक प्रक्रिया है।
पञ्चभूसंस्कार के पाँच चरण हैं:
१. परिसमूहन
२. उपलेपन
३. उल्लेखन
४. उद्धरण
५. अभ्युक्षण
इन पञ्चभूसंस्कारों के पूर्ण होने के उपरांत ही कुंड अग्नि-स्थापना के योग्य बनता है।





