विस्तृत उत्तर
अभ्युक्षण पञ्चभूसंस्कार का पाँचवाँ और अंतिम चरण है। अंत में, पंचगव्य अथवा गंगाजल से कुशा के द्वारा वेदी पर जल का सिंचन (छिड़काव) किया जाता है।
यह अंतिम शुद्धि है, जो भूमि को अग्नि देव के अवतरण के लिए पूर्णतः शीतल, पवित्र एवं सुपात्र बनाती है।
इन पञ्चभूसंस्कारों के पूर्ण होने के उपरांत ही कुंड अग्नि-स्थापना के योग्य बनता है।
