विस्तृत उत्तर
परिसमूहन पञ्चभूसंस्कार का प्रथम चरण है। सर्वप्रथम यजमान अपने हाथ में कुशा (पवित्र घास) लेकर दक्षिण दिशा से उत्तर दिशा की ओर कुंड के स्थान को झाड़कर साफ करता है। इसका उद्देश्य भूमि पर स्थित भौतिक अशुद्धियों और धूल-कणों को हटाना है। उन कुशाओं को ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में विसर्जित कर दिया जाता है।

