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शिव पूजा विधि📜 शिव पुराण (कोटिरुद्र संहिता अध्याय 11-12), लिंग पुराण (पूर्वभाग अध्याय 19), स्कन्द पुराण (काशीखंड अध्याय 8), वास्तु शास्त्र3 मिनट पठन

घर में शिवलिंग स्थापित करने के वास्तु नियम क्या हैं?

संक्षिप्त उत्तर

वास्तु नियम: शिवलिंग अंगूठे के आकार तक (4-6 इंच)। ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में स्थापित करें। जलधारी का मुख उत्तर दिशा में। नर्मदेश्वर/चांदी का शिवलिंग सर्वश्रेष्ठ। एक से अधिक न रखें। नित्य पूजा व जलाभिषेक अनिवार्य (लिंग पुराण)। ऊपर बाथरूम/किचन न हो।

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विस्तृत उत्तर

घर में शिवलिंग स्थापित करना अत्यंत शुभ है, किन्तु इसके कठोर नियम हैं। शिव पुराण, लिंग पुराण और वास्तु शास्त्र में ये नियम विस्तार से वर्णित हैं:

1आकार — सबसे महत्वपूर्ण नियम

शिव पुराण (कोटिरुद्र संहिता) के अनुसार गृहस्थ व्यक्ति को अंगुष्ठ प्रमाण (अंगूठे के आकार) से बड़ा शिवलिंग घर में नहीं रखना चाहिए। अधिकतम 4-6 इंच तक का शिवलिंग घर के लिए उपयुक्त है। बड़ा शिवलिंग अत्यंत ऊर्जावान होता है, जिसे घर के वातावरण में संभालना कठिन है। मंदिर में किसी भी आकार का शिवलिंग स्थापित कर सकते हैं।

2दिशा — ईशान कोण (उत्तर-पूर्व)

वास्तु शास्त्र के अनुसार शिवलिंग घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में ही स्थापित करें। यह दिशा देवी-देवताओं की दिशा मानी गई है।

3जलधारी का मुख

शिवलिंग की जलधारी (सोमसूत्र/निर्मली) का मुख सदैव उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। पश्चिम, दक्षिण या पूर्व दिशा में जलधारी का मुख रखना अशुभ माना गया है।

4पूजक का मुख

पूजा करते समय भक्त का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। दक्षिण दिशा में मुख करके पूजा कभी न करें।

5शिवलिंग का प्रकार

घर के लिए नर्मदेश्वर (बाणलिंग) शिवलिंग सर्वश्रेष्ठ है — यह स्वयंभू है, प्राण प्रतिष्ठा अनावश्यक। धातु के शिवलिंग में सोना, चांदी या तांबे का ही प्रयोग करें। स्कंद पुराण और शिव पुराण के अनुसार चांदी का शिवलिंग विशेष शुभ है।

6संख्या

घर में एक से अधिक शिवलिंग न रखें। शिव एक हैं, अतः एक ही शिवलिंग पर्याप्त है।

7स्थापना स्थल के नियम

  • शिवलिंग को सीधे जमीन पर न रखें, सदैव जलधारी सहित चौकी पर स्थापित करें।
  • शिवलिंग के ऊपर की छत पर बाथरूम, किचन या सीढ़ियां नहीं होनी चाहिए।
  • पूजा स्थल स्वच्छ और शांत होना चाहिए।
  • शिवलिंग को दीवार से हटाकर रखें।

8नित्य पूजा अनिवार्य

लिंग पुराण (पूर्वभाग अध्याय 19, श्लोक 11-15) के अनुसार घर में स्थापित शिवलिंग की नित्य पूजा और जलाभिषेक अनिवार्य है। बिना नियमित पूजा के शिवलिंग रखने से वास्तु दोष, धन हानि और मानसिक अशांति उत्पन्न होती है।

9सूतक नियम

घर में किसी की मृत्यु हो तो 13 दिन तक शिवलिंग की पूजा स्थगित रखें।

स्थापना विधि

  1. 1प्रातःकाल स्नान करें।
  2. 2चौकी पर लाल या सफेद वस्त्र बिछाएं।
  3. 3तांबे या पीतल की थाली में शिवलिंग रखें।
  4. 4गंगाजल और पंचामृत से अभिषेक करें।
  5. 5'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जप करें।
  6. 6चंदन का त्रिपुंड लगाएं, अक्षत और कलावा अर्पित करें।
  7. 7देसी घी का दीपक जलाकर आरती करें।
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शास्त्रीय स्रोत
शिव पुराण (कोटिरुद्र संहिता अध्याय 11-12), लिंग पुराण (पूर्वभाग अध्याय 19), स्कन्द पुराण (काशीखंड अध्याय 8), वास्तु शास्त्र
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