विस्तृत उत्तर
तर्पण में तीन प्रमुख सामग्रियाँ अनिवार्य रूप से लगती हैं। शास्त्रीय आधार के अनुसार कर्ता अंजलि में शुद्ध जल, कुशा, और काले तिल लेकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों के गोत्र और नाम का उच्चारण करता है।
तर्पण की तीन मुख्य सामग्रियाँ इस प्रकार हैं। पहली सामग्री है शुद्ध जल। यह तर्पण का प्रमुख माध्यम है, क्योंकि तर्पण वह प्रक्रिया है जिसमें जल के माध्यम से पितरों की प्यास बुझाई जाती है। जल पितरों की प्यास बुझाने का सर्वोच्च प्रतीक है। दूसरी सामग्री है कुशा घास। यह एक अत्यंत पवित्र घास है, जिसकी उत्पत्ति भगवान वराह के दिव्य रोमों से हुई है। तीसरी सामग्री है काले तिल। ये भी पवित्र हैं, क्योंकि इनकी उत्पत्ति भगवान वराह के पसीने की बूंदों से हुई है।
इन सामग्रियों की उत्पत्ति की कथा भी विशेष है। तदनंतर भगवान के शरीर से उत्पन्न पसीने की बूंदों से पृथ्वी पर काले तिल की उत्पत्ति हुई, और उनके दिव्य रोमों से पवित्र कुशा घास का प्रादुर्भाव हुआ। यही कारण है कि आज तक श्राद्ध कर्म में पिण्ड, काले तिल और कुशा को सबसे अनिवार्य और पवित्र माना जाता है, क्योंकि इनकी उत्पत्ति साक्षात् नारायण के शरीर से हुई है।
इन तीनों सामग्रियों को कैसे लेना है तो दोनों हाथ जोड़कर अंजलि बनानी होती है, और उस अंजलि में तीनों सामग्रियाँ रखी जाती हैं। हर सामग्री का अपना महत्व है। शुद्ध जल पितरों की प्यास का प्रत्यक्ष माध्यम है। कुशा शुद्धता और पवित्रता का प्रतीक है, और इसका दिव्य उद्भव है। काले तिल भी दिव्य हैं, और शास्त्रों में पितरों को अत्यंत प्रिय माने गए हैं।
पितरों को कौन-सी चीज़ें प्रिय हैं तो विष्णु पुराण और मत्स्य पुराण के अनुसार पितरों को तिल, कुशा, गाय का दूध, शहद, जौ और सफेद फूल अत्यंत प्रिय हैं। तर्पण में इन तीनों सामग्रियों के साथ कर्ता दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों के गोत्र और नाम का उच्चारण करता है, और अंगूठे के मूल भाग पितृ तीर्थ से जल गिराता है। साथ ही तस्मै स्वधा नमः मंत्र का उच्चारण किया जाता है। इन तीनों सामग्रियों के बिना तर्पण नहीं हो सकता, क्योंकि शास्त्रों में इनका स्पष्ट निर्देश है। शास्त्रीय आधार के रूप में आश्वलायन गृह्यसूत्र, गरुड़ पुराण और याज्ञवल्क्य स्मृति में श्राद्ध की सूक्ष्म विधि का विस्तार से वर्णन है। निष्कर्षतः तर्पण में तीन प्रमुख सामग्रियाँ लगती हैं, जो हैं शुद्ध जल, कुशा घास, और काले तिल। ये तीनों सामग्रियाँ साक्षात् नारायण के शरीर से उत्पन्न हुई हैं या पितरों को अत्यंत प्रिय हैं, इसलिए इनके बिना तर्पण अधूरा रह जाता है।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक



