विस्तृत उत्तर
हाँ, बेटी अपने पिता/माता का श्राद्ध कर सकती है — शास्त्रों में इसका विधान है।
शास्त्रीय आधार
- ▸गरुड़ पुराण: यदि पुत्र न हो या पुत्र श्राद्ध न करे, तो बेटी या दामाद श्राद्ध कर सकते हैं।
- ▸मनुस्मृति: *'पुत्रिकायाः पुत्रो...'* — पुत्री का पुत्र (दौहित्र/नाती) भी पिंडदान कर सकता है।
- ▸*'यदि किसी महिला की कोई संतान न हो तो वह अपने पति का श्राद्ध खुद कर सकती है।'*
श्राद्ध अधिकार क्रम
- 1पुत्र (सबसे पहला अधिकार)
- 2पौत्र (पुत्र का पुत्र)
- 3प्रपौत्र
- 4पत्नी (पति के लिए)
- 5बेटी/दामाद
- 6भाई/भतीजा
- 7शिष्य या कोई श्रद्धालु

