📖
विस्तृत उत्तर
हाँ, बेटी अपने पिता/माता का श्राद्ध कर सकती है — शास्त्रों में इसका विधान है।
शास्त्रीय आधार
- ▸गरुड़ पुराण: यदि पुत्र न हो या पुत्र श्राद्ध न करे, तो बेटी या दामाद श्राद्ध कर सकते हैं।
- ▸मनुस्मृति: *'पुत्रिकायाः पुत्रो...'* — पुत्री का पुत्र (दौहित्र/नाती) भी पिंडदान कर सकता है।
- ▸*'यदि किसी महिला की कोई संतान न हो तो वह अपने पति का श्राद्ध खुद कर सकती है।'*
श्राद्ध अधिकार क्रम
- 1पुत्र (सबसे पहला अधिकार)
- 2पौत्र (पुत्र का पुत्र)
- 3प्रपौत्र
- 4पत्नी (पति के लिए)
- 5बेटी/दामाद
- 6भाई/भतीजा
- 7शिष्य या कोई श्रद्धालु
आधुनिक दृष्टिकोण: बेटा-बेटी में भेद उचित नहीं। बेटी = पुत्र समान। श्रद्धा और भाव से किया गया श्राद्ध — चाहे बेटी करे या बेटा — पितरों तक अवश्य पहुँचता है।
🔗
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक
इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें
क्या यह उत्तर सहायक था?

