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श्राद्ध विधि📜 धर्मशास्त्र, गरुड़ पुराण1 मिनट पठन

नारायण बलि पूजा कब करवानी चाहिए?

संक्षिप्त उत्तर

नारायण बलि = अकाल मृत्यु, प्रेत बाधा, गंभीर पितृ दोष के लिए। त्र्यंबकेश्वर/गया/प्रयागराज में। 3-5 दिन अनुष्ठान। योग्य पुरोहित से करवाएँ। बिना आवश्यकता न करें।

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विस्तृत उत्तर

नारायण बलि एक विशेष वैदिक अनुष्ठान है जो प्रेत बाधा, अकाल मृत्यु और पितृ दोष निवारण के लिए किया जाता है।

कब करवाएँ

  1. 1अकाल मृत्यु — दुर्घटना, आत्महत्या, हत्या, सर्पदंश, जलने से मृत्यु — ऐसी अप्राकृतिक मृत्यु पर।
  2. 2प्रेत बाधा — परिवार में प्रेत योनि संबंधी समस्या।
  3. 3गंभीर पितृ दोष — सामान्य उपायों से लाभ न हो।
  4. 4श्राद्ध कभी न किया हो — वर्षों से पितरों का श्राद्ध छोड़ दिया हो।
  5. 5संतान सुख न हो — पितृ दोष के कारण।

कहाँ: त्र्यंबकेश्वर (नासिक), गया, प्रयागराज, काशी — प्रमुख स्थान।

विधि: 3-5 दिन का अनुष्ठान। योग्य विद्वान ब्राह्मण/पुरोहित से करवाएँ। स्वयं करने का विधान नहीं।

ध्यान दें: यह गंभीर अनुष्ठान है — बिना आवश्यकता न करवाएँ। विश्वसनीय पंडित से परामर्श लें।

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शास्त्रीय स्रोत
धर्मशास्त्र, गरुड़ पुराण
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