विस्तृत उत्तर
गया में पिंडदान एक विस्तृत अनुष्ठान है — योग्य पंडित (गया पुरोहित) से करवाएँ।
संक्षिप्त विधि
- 1तैयारी: गया पहुँचकर स्नान, शुद्ध वस्त्र। श्रद्धा भाव।
- 2गया पुरोहित (पंडा) से संपर्क — वे विधि बताएँगे और करवाएँगे।
- 3संकल्प — पितरों के नाम + गोत्र + तर्पण का संकल्प लें।
- 4विष्णुपद मंदिर — सबसे पहले विष्णुपद में पिंडदान।
- 5फल्गु नदी तट — नदी तट पर पिंड अर्पित करें।
- 6पिंड: जौ का आटा + तिल + शहद + गंगाजल मिलाकर गोल पिंड बनाएँ।
- 7तर्पण मंत्र सहित पिंड अर्पित करें।
- 8पंचवटी, अक्षयवट आदि स्थानों पर भी पिंडदान।
- 9ब्राह्मण भोजन + दक्षिणा।
- 10कुल 7-17 दिन का विधान (संक्षिप्त 1-3 दिन भी)।
कौन कर सकता है: पुत्र (सबसे उत्तम), पौत्र, भाई, भतीजा। महिला भी कर सकती है (संतानहीन विधवा)।
कब: पितृ पक्ष सर्वोत्तम। अमावस्या, एकादशी, संक्रांति भी शुभ। वर्ष भर किया जा सकता है।
महत्वपूर्ण: गया में कई अनधिकृत पंडा भी हैं — विश्वसनीय पुरोहित से ही करवाएँ।





