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श्राद्ध विधि📜 गरुड़ पुराण, धर्मशास्त्र1 मिनट पठन

श्राद्ध में कौवे को ग्रास क्यों देते हैं?

संक्षिप्त उत्तर

कौवा = पितरों का दूत (गरुड़ पुराण)। कौवे से पितर भोजन ग्रहण करते हैं। पंचबलि में कौवा = पितर। कौवा खाए = पितर तृप्त, न खाए = अतृप्त। भोजन सबसे पहले कौवे के लिए निकालें।

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विस्तृत उत्तर

श्राद्ध में कौवे को ग्रास (भोजन) देना अनिवार्य विधान है।

कारण

  1. 1कौवा = पितरों का दूत — गरुड़ पुराण के अनुसार कौवा यमराज/पितरों का संदेशवाहक है। कौवे के माध्यम से पितर भोजन ग्रहण करते हैं।
  2. 2पंचबलि — श्राद्ध में पांच प्राणियों को भोजन देना अनिवार्य:
  • गाय (देवता)
  • कुत्ता (भैरव/यम)
  • कौवा (पितर)
  • चींटी (सूक्ष्म जीव)
  • देवता (अग्नि में आहुति)
  1. 1पितर तृप्ति का संकेत — कौवा ग्रास खाए = पितर तृप्त/प्रसन्न। न खाए = पितर अतृप्त।

विधि: श्राद्ध का भोजन बनने के बाद सबसे पहले एक हिस्सा निकालकर छत/आँगन में कौवे के लिए रखें। *'वायस (कौवा) तृप्यतु'* बोलें।

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शास्त्रीय स्रोत
गरुड़ पुराण, धर्मशास्त्र
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