विस्तृत उत्तर
वास्तु शास्त्र के अनुसार पूजा घर बनाने के लिए सबसे उत्तम दिशा ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) है। इस दिशा को 'देव दिशा' भी कहा जाता है क्योंकि यहाँ सकारात्मक ऊर्जा का संचय सबसे अधिक होता है।
दिशा प्राथमिकता क्रम
- 1ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) — सर्वश्रेष्ठ, यह दिशा ईश्वरीय शक्ति के आगमन की दिशा मानी जाती है।
- 2पूर्व दिशा — यदि ईशान कोण उपलब्ध न हो तो यह दूसरा सर्वोत्तम विकल्प है।
- 3उत्तर दिशा — तीसरा विकल्प, यह भी शुभ मानी जाती है।
निषेध दिशाएँ
- ▸दक्षिण दिशा — पूजा घर कभी नहीं बनाना चाहिए, यह यमराज की दिशा मानी जाती है।
- ▸नैऋत्य कोण (दक्षिण-पश्चिम) — इस दिशा में पूजा घर बनाने से नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
अन्य नियम
- ▸पूजा घर का द्वार पूर्व या उत्तर दिशा में खुलना चाहिए।
- ▸पूजा घर में पर्याप्त प्रकाश और वायु संचार होना चाहिए।
- ▸पूजा घर का रंग गुलाबी, पीला या सफेद होना शुभ है।
- ▸एक घर में एक से अधिक पूजा घर नहीं होने चाहिए, इससे ऊर्जा में टकराव होता है।
ध्यान दें: यह जानकारी वास्तु शास्त्र और सामान्य धार्मिक परंपराओं पर आधारित है।





