विस्तृत उत्तर
उल्लेखन पञ्चभूसंस्कार का तृतीय चरण है। स्रुवा (हवन में प्रयुक्त होने वाला चम्मच) के मूल भाग से अथवा कुशा से कुंड के भीतर पश्चिम से पूर्व की ओर 'प्रादेश मात्र' (लगभग एक बालिश्त) लंबी तीन रेखाएं खींची जाती हैं।
ध्यान रहे, इन रेखाओं को खींचने का क्रम दक्षिण से प्रारंभ होकर उत्तर की ओर होना चाहिए (अर्थात पहली रेखा दक्षिण में, दूसरी मध्य में, और तीसरी उत्तर में)। विपरीत क्रम में रेखा खींचना अमंगलकारी माना गया है।
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