विस्तृत उत्तर
भूत ज्वर और प्रेत ज्वर अदृश्य एवं तांत्रिक ज्वरों की श्रेणी में आते हैं।
ये मानसिक व्याधियाँ, मनोग्रस्तियाँ और नकारात्मक ऊर्जाओं के प्रभाव को दर्शाते हैं।
स्तोत्र के भूत-प्रेत-डाकिनी शमन खंड में, भगवान को बारह प्रकार के भूत, तेरह-सोलह प्रकार के प्रेत, और पंद्रह प्रकार की डाकिनी-शाकिनी को 'हन हन' (मार डालने) और 'दहन' (जलाने) का निर्देश देते हुए उनका आह्वान किया जाता है।





