विस्तृत उत्तर
स्तोत्र में ज्वरों का अत्यंत व्यापक और वर्गीकृत उल्लेख किया गया है। इन्हें तीन श्रेणियों में बाँटा जा सकता है:
- 1दैहिक ज्वर (शारीरिक): वात ज्वर, कफ पित्तक, सन्निपात ज्वर — ये त्रिदोषों के असंतुलन से उत्पन्न होते हैं।
- 1कालजन्य ज्वर: एकाहिक (एक दिन का), द्वयाहिक, त्र्याहिक, चातुर्थिक, पंचाहिक ज्वर — ये चक्रीय प्रकृति के होते हैं।
- 1अदृश्य एवं तांत्रिक ज्वर: भूत ज्वर, प्रेत ज्वर, पिशाच ज्वर, डाकिनी ज्वर, शाकिनी ज्वर।
- 1आध्यात्मिक/कर्मजन्य ज्वर: ब्रह्म ज्वर, विष्णु ज्वर, रुद्र ज्वर — ये असाध्य, अत्यंत तीव्र या कर्म से उत्पन्न रोगों की ओर संकेत करते हैं।





