विस्तृत उत्तर
नीलकंठ अघोरास्त्र स्तोत्र के पाठ से निम्नलिखित रोगों का शमन होता है:
शारीरिक रोग: वात ज्वर, कफ पित्तक, सन्निपात ज्वर, त्रिदोषों से उत्पन्न रोग, काश (खाँसी), श्वास, श्लेष्मादिक रोग।
चक्रीय ज्वर: एकाहिक, द्वयाहिक, त्र्याहिक, चातुर्थिक, पंचाहिक ज्वर।
आध्यात्मिक रोग: भूत ज्वर, प्रेत ज्वर, पिशाच ज्वर, बाल ज्वर, ग्रह ज्वर, ताप ज्वर, ब्रह्म ज्वर, विष्णु ज्वर, रुद्र ज्वर।
फलश्रुति के अनुसार: सभी रोग नष्ट हो जाते हैं (रोगाह सर्वे प्रणश्यंती), और किसी भी प्रकार के विष का प्रभाव समाप्त हो जाता है (विषं विद्रवते)।





