विस्तृत उत्तर
कालजन्य ज्वर चक्रीय प्रकृति के होते हैं, जो प्रायः असाध्य माने जाते हैं।
स्तोत्र में वर्णित कालजन्य ज्वर हैं:
- ▸एकाहिक (एक दिन का ज्वर)
- ▸द्वयाहिक (दो दिन का)
- ▸त्र्याहिक (तीन दिन का)
- ▸चातुर्थिक (चार दिन का)
- ▸पंचाहिक (पाँच दिन का)
यह वर्गीकरण प्राचीन भारतीय चिकित्सा और कर्म सिद्धांत की गहरी समझ को दर्शाता है।